विध्वंस…

कहीं पढ़ रहा था कि हमें उन दरवाज़ों का शुक्रगुज़ार होना चाहिए जो बंद हो गए, वो दोस्तियां जो आगे नहीं बढ़ीं और हर उस चीज़ का जो हमसे टूट या छूट गयी… यह विध्वंस महादेव की उस अटूट कृपा के समान है जो हमें उन लोगों, जगहों और चीज़ों से दूर ले जाती है […]

विध्वंस…

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